16 दिसंबर 2012 , सात साल से भी ज्यादा लंबा इंतजार। हमारे देश में किसी अदालती मामले का सालो साल चलना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन कमसे कम इन जैसे मामलों के बारे में तो फैसला जल्द से जल्द होना ही चाहिए।
देर आए दुरुस्त आए, बकवास है ऐ देर कभी दुरुस्त नहीं हो सकता, ऐ किसी रोटी के उस टुकड़े की तरह है मानो किसी ने अपना पेट भरने के बाद भीख की तरह झोली में डाल दिया हो। इतनी सुनवाइयां ना जाने कितनी तारीखे उफ़ खून खुलता है ऐसे प्रणाली पर।
न्याय में देरी कहीं ना कहीं दरिंदगी करने वालो के मन में भय ना पैदा उनके बच निकालने की उम्मीद जगाता होगा।
ना जाने किस युग में जी रहे है हम, महिलाएं सुरक्षित नहीं है, स्त्रियों के प्रति ऐसा घृणित भाव रखने वाले लोगों को तो.....
खैर पूरे देश में फैसले के बाद खुशी की लहर है, TV में, अखबारों में, चारो तरफ उन दरिंदों के फांसी की ही चर्च है।
देर आए दुरुस्त आए, बकवास है ऐ देर कभी दुरुस्त नहीं हो सकता, ऐ किसी रोटी के उस टुकड़े की तरह है मानो किसी ने अपना पेट भरने के बाद भीख की तरह झोली में डाल दिया हो। इतनी सुनवाइयां ना जाने कितनी तारीखे उफ़ खून खुलता है ऐसे प्रणाली पर।
न्याय में देरी कहीं ना कहीं दरिंदगी करने वालो के मन में भय ना पैदा उनके बच निकालने की उम्मीद जगाता होगा।
ना जाने किस युग में जी रहे है हम, महिलाएं सुरक्षित नहीं है, स्त्रियों के प्रति ऐसा घृणित भाव रखने वाले लोगों को तो.....
खैर पूरे देश में फैसले के बाद खुशी की लहर है, TV में, अखबारों में, चारो तरफ उन दरिंदों के फांसी की ही चर्च है।
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